प्रश्नोत्तर ▪ कक्षा 10 ▪ अध्याय 1
संसाधन एवं विकास प्रश्नोत्तर
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
(i) तीन
राज्यों के नाम बताएं जहां काली मृदा पाई
जाती है। इस पर मुख्य रूप से कौन सी फसल उगाई जाती है?
उत्तर-
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्यों में काली मृदा पाई जाती है। इस पर
मुख्य रूप से कपास की खेती की जाती है। इस मृदा को रेगुर मृदा भी कहा जाता है।
(ii) पूर्वी तट के नदी डेल्टाओं पर किस प्रकार की मृदा पाई
जाती है? इस प्रकार की मृदा की तीन मुख्य विशेषताएं क्या है?
उत्तर-
पूर्वी तट के नदी डेल्टाओं पर जलोढ़ मृदा पाई जाती है। इस प्रकार की मृदा की तीन
मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
1.
जलोढ़
मृदा बहुत उपजाऊ होती है।
2.
यह
मृदा गेहूं, चावल, गन्ना, अन्य अनाजों और दलहन फसलों की खेती के लिए उपयुक्त होती
है।
3.
जलोढ़
मृदा क्षेत्रों में गहन कृषि के कारण जनसंख्या घनत्व अधिक पाया जाता है।
(iii) पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन की रोकथाम के लिए क्या
कदम उठाने चाहिए?
उत्तर-
पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन की रोकथाम के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते
हैं-
1.
ढाल
वाली भूमि पर समोच्च रेखाओं के समानान्तर हल चलाना- समोच्च जुताई (Contour
ploughing)
2.
फसलों
के बीच घास की पट्टियां उगाकर पवन द्वारा जनित बल को कमजोर करना– पट्टी कृषि (Strip Farming)
3.
पेड़ों
को कतारों में लगाकर रक्षक मेखला बनाना
(iv) जैव और अजैव संसाधन क्या होते हैं? कुछ उदाहरण दें।
उत्तर-
जैव संसाधन- जीवमंडल से प्राप्त होने वाले ऐसे संसाधन जिनमें जीवन व्याप्त है, जैव
संसाधन कहलाते हैं। जैसे- मनुष्य, वनस्पतिजात, प्राणीजात, मत्स्य जीवन, पशुधन आदि।
अजैव
संसाधन- निर्जीव वस्तुओं से बने संसाधन अजैव संसाधन कहलाते हैं। जैसे- चट्टानें,
धातुएं आदि।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।
(i) भारत में भूमि उपयोग प्रारूप का वर्णन करें। वर्ष 1960-61 से वन के अंतर्गत क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई,
इसका क्या कारण है?
उत्तर-
भारत में भू-संसाधनों के उपयोग को विभिन्न भागों में बाँटा गया है- वनों के
अंतर्गत भूमि, कृषि योग्य भूमि, चारागाह के लिए भूमि और बंजर भूमि। बंजर
भूमि में पहाड़ी चट्टानें, सूखी
और मरुस्थलीय भूमि शामिल है। गैर-कृषि प्रयोजनों में लगाई गयी भूमि में बस्ती, सड़कें, रेल लाइन, उद्योग
आदि आते हैं। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 54% भूमि कृषि योग्य, 24.56% भूमि वनों एवं वृक्षों के अंतर्गत और 3.45% भूमि
चारागाह के लिए उपलब्ध है।
वर्ष
1960-61 से वनों के अंतर्गत क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई है क्योंकि स्वतंत्रता काल के बाद मुख्य रूप से हरित
क्रांति के बाद अधिकतर भूमि कृषि के लिए तथा
आधारभूत संरचना की सुविधाओं के विकास के लिए भूमि का उपयोग किया गया जो वन क्षेत्र
के निकासी के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अतिरिक्त औद्योगीकरण तथा नगरीकरण भी
वनोन्मूलन के लिए जिम्मेदार हैं। इस प्रकार 1960-61 से वनों के अंतर्गत भूमि का 4% ही विस्तार हुआ है।
(ii) प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण संसाधनों का अधिक
उपयोग कैसे हुआ है?
उत्तर-
प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण संसाधनों को अधिक उपभोग होने के निम्नलिखित
कारण हैं –
1. कृत्रिम
उपकरण प्रौद्योगिकी विकास की देन हैं, परिणामस्वरूप
उत्पादन में बढ़त के कारण संसाधनों का अधिक उपभोग किया जाता है।
2. तकनीकी
विकास के कारण आर्थिक विकास संभव है। जब किसी देश की आर्थिक स्थिति में सुधार आता
है तब लोगों की जरूरतें बढती है। फलस्वरूप संसाधनों का अधिक उपयोग होता है।
3. आर्थिक विकास नवीन तकनीकी विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। इस कारण नए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जाता है।
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