प्रश्नोत्तर ▪कक्षा 12 ▪अध्याय 1

 भारत लोग और अर्थव्यवस्था 

जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन अध्याय के प्रश्नोत्तर

2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें।

(i) भारत के अत्यंत ऊष्ण एवं शुष्क तथा अत्यंत शीत आर्द्र प्रदेशों में जनसंख्या का घनत्व निम्न है। इस कथन के दृष्टिकोण से जनसंख्या के वितरण में जलवायु की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:  जनसंख्या के वितरण पर जलवायु का गहरा प्रभाव पड़ता है राजस्थान के अत्यंत उष्ण व शुष्क प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश के अंतर्गत शीत तथा मेघालय के अंतर्गत आर्द्र देशों में जलवायु के अनुकूल होने के कारण जनसंख्या का घनत्व निम्न है।

(ii) भारत के किन राज्यों में विशाल ग्रामीण जनसंख्या है? इतनी विशाल ग्रामीण जनसंख्या के लिए उत्तरदाई एक कारण को लिखिए।

उत्तर: भारत की 69% जनसंख्या गांवों में रहती है। हिमाचल प्रदेश की 90%, बिहार की 89%, असम की 86%, उड़ीसा की 83% तथा उत्तर प्रदेश की 78% जनसंख्या गांवों में रहती है, साथ ही महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में विशाल ग्रामीण जनसंख्या है क्योंकि इन राज्यों में उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु तथा सिंचाई की सुविधा के कारण  कृषि व्यवसाय को ठोस आधार प्राप्त है।

(iii) भारत के कुछ राज्यों में अन्य राज्यों की अपेक्षा श्रम सहभागिता ऊंची क्यों है?

उत्तर: भारत के संदर्भ में यह सही है कि आर्थिक विकास के निम्न स्तरों वाले क्षेत्रों में श्रम की सहभागिता दर ऊँची है क्योंकि निर्वाह अथवा लगभग निर्वाह की आर्थिक क्रियाओं के निष्पादन में अनेक कामगारों की जरूरत होती है। जैसे-हिमाचल प्रदेश तथा नागालैंड में कृषकों की संख्या बहुत अधिक है। दूसरी ओर आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल मध्यप्रदेश में कृषि मजदूरों की संख्या अधिक है।  

(iv) “कृषि सेक्टर में भारतीय श्रमिकों का सर्वाधिक अंश संलग्न है।स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: भारत की कुल श्रमजीवी जनसंख्या का लगभग 54.6 प्रतिशत कृषक और कृषि मजदूर हैं जबकि केवल 3.8 प्रतिशत श्रमिक घरेलू उद्योगों में तथा 41.6 प्रतिशत श्रमिक अन्य विनिर्माण, व्यापार वाणिज्य सेवाओं में कार्यरत हैं। अतः आंकड़े स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि भारतीय श्रमिकों का सर्वाधिक अंश कृषि सेक्टर में संलग्न है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।

(i) भारत में जनसंख्या के घनत्व के स्थानिक वितरण की विवेचना कीजिए।

उत्तर: जनसंख्या के घनत्व को प्रति इकाई क्षेत्र में व्यक्तियों की संख्या द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। इससे भूमि के संदर्भ में जनसंख्या के स्थानिक वितरण को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलती है। भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि०मी० (2011 की जनगणना) है। यह एशिया के सबसे सघनतम बसे देशों में बांग्लादेश (849 व्यक्ति) तथा जापन (334 व्यक्ति) के बाद तीसरे स्थान पर है। भारत में जनसंख्या के वितरण तथा जनसंख्या के घनत्व में स्थानिक भिन्नता देखने को मिलती है। जहाँ अरुणाचल प्रदेश में जनसंख्या का घनत्व 17 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि०मी० है वहीं दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में यह 11,297 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि.मी. है। राज्यों में बिहार का जनघनत्व 1102,  पश्चिम बंगाल का 1029, केरल का 850 तथा उत्तर प्रदेश का 828 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. है। यद्यपि उत्तर प्रदेश की जनसंख्या सभी राज्यों में सर्वाधिक है किंतु एक वर्ग कि.मी. भूमि पर रहने वाले लोगों की संख्या के अनुसार कई राज्य उससे आगे हैं। दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति के हिस्से में पश्चिमी बंगाल, बिहार केरल के व्यक्ति की अपेक्षा ज्यादा भूमि आती है। निम्नतम जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों के अन्तर्गत  अरुणाचल प्रदेश में 17, मिजोरम में 52 तथा सिक्किम में 86 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि०मी० है। अतः यहाँ रहने वाले लोगों के हिस्से में उस राज्य की अधिक भूमि आती है।

(ii) भारत की जनसंख्या के व्यावसायिक संगठन का विवरण दीजिए।

उत्तर: व्यावसायिक संघटन से तात्पर्य किसी व्यक्ति का कृषि, विनिर्माण, व्यापार, सेवाओं अथवा किसी ऐसी गतिविधि में संलग्न होना है जिससे उसे आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। भारत की जनसंख्या के व्यावसायिक संघटन का अध्ययन करने से पता चलता है कि यहाँ द्वितीयक और तृतीयक सेक्टरों की अपेक्षा प्राथमिक सेक्टर में लगे श्रमिकों की संख्या अधिक है। भारत की कुल श्रमजीवी जनसंख्या का लगभग 54.6 प्रतिशत कृषक और कृषि मजदूर हैं जबकि केवल 3.8 प्रतिशत श्रमिक घरेलू उद्योगों में तथा 41.6 प्रतिशत श्रमिक अन्य विनिर्माण, व्यापार वाणिज्य सेवाओं में कार्यरत हैं। जो घरेलू उद्योगों, व्यापार, वाणिज्य, विनिर्माण, मरम्मत अन्य सेवाओं में कार्यरत हैं। देश में पुरुष श्रमिकों की संख्या स्त्री श्रमिकों की संख्या से तीनों सेक्टरों में अधिक है। महिला श्रमिकों की संख्या प्राथमिक सेक्टर में अपेक्षाकृत अधिक है। यद्यपि विगत कुछ वर्षों में महिलाओं की द्वितीयक तृतीयक सेक्टरों की सहभागिता में सुधार हुआ है। यह भी जानने योग्य है कि पिछले कुछ दशकों में भारत में कृषि सेक्टर के श्रमिकों के अनुपात में गिरावट दर्ज की जा रही है तथा द्वितीयक तृतीयक सेक्टर में सहभागिता दर बढ़ी है। देश के विभिन्न सेक्टरों में श्रम सहभागिता दर में स्थानिक भिन्नता भी देखने को मिलती है, जैसे हिमाचल प्रदेश नागालैंड में कृषकों की संख्या अधिक है, वहीं आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा मध्य प्रदेश में कृषि मजदूरों की संख्या अधिक है। जबकि नगरीकृत क्षेत्रों में श्रमिकों का बहुत बड़ा अनुपात अन्य सेवाओं में संलग्न है।

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