प्रश्नोत्तर ▪ कक्षा 10 ▪ अध्याय 3
जल
संसाधन अध्याय के प्रश्नोत्तर
Q2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में
दीजिए-
(i) व्याख्या करें कि जल किस प्रकार
नवीकरण योग्य संसाधन है?
उत्तर- नदियों का जल
प्रवाह समुद्र में समाप्त हो जाता है। वहां से यह जल वाष्प के रूप में हाइड्रोलॉजिकल चक्र में प्रवेश करता
है। वाष्प के ऊपर उठने से बादल बनते हैं जो कि भूतल एवं सागर में वर्षा करते हैं। भूतल
वर्षा का पानी पुनः नदियों द्वारा समुद्र तक पहुँचता है। इस चक्र द्वारा मीठे पानी
का नवीनीकरण किया जाता है। इस तरह पानी एक नवीकरण योग्य संसाधन है।
(ii) जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या है?
उत्तर- जल दुर्लभता या पानी
की कमी तब होती है जब पानी की उपलब्धता पानी की मांग से अधिक होती है। यह आबादी
में वृद्धि, पानी की बढ़ती मांग और इसके असमान वितरण के कारण होती है।
(iii) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानि की
तुलना करें।
उत्तर- बहुउद्देशीय नदी
परियोजनाएँ सिंचाई, बिजली उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, अंतर्देशीय नेविगेशन और मत्स्य उत्पादन में मदद करती हैं। नदियों पर बाँध
के निर्माण से स्थानीय वनस्पति और जीव नष्ट हो जाते हैं। कई मूल गाँव जलमग्न हो जाते
हैं और बहुत से लोग अपनी जमीन एवं आजीविका खो देते हैं।
Q3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में
दीजिए-
(i) राजस्थान के अर्ध-शुष्क
क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है? व्याख्या
कीजिए।
उत्तर- राजस्थान के अर्ध
शुष्क क्षेत्रों के घरों में पीने के पानी के भंडारण के लिए पारंपरिक रूप से टैंक
बनाए गए हैं जिन्हें टांका कहते हैं। टांका बड़े होते हैं और अच्छी तरह से विकसित छत वर्षाजल
संचयन प्रणाली का एक हिस्सा होते हैं। टैंक मुख्य घर या आंगन के अंदर निर्मित होते
हैं और पाइप के माध्यम से घरों की ढलान वाली छतों से जुड़े होते हैं। छत
पर गिरने वाला बारिश का पानी पाइप के द्वारा नीचे टैंकों में जमा हो जाता है।
बारिश का पहला जल एकत्र नहीं किया जाता है क्योंकि इस पानी से छत और पाइपों की सफाई
की जाती है। इसके बाद के बारिश के पानी को एकत्र किया जाता है। इस पानी का उपयोग
अगली बारिश के मौसम तक किया जाता है और अन्य स्रोतों के सूख जाने के बाद
भी यह पानी का एक विश्वसनीय स्रोत होता है। टैंक घरों को ठंडा करने में भी मदद
करते हैं।
(ii) परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपनाकर जल संरक्षण एवं भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है?
उत्तर- प्राचीन काल में
लोगों को वर्षा पद्धति और मृदा के गुणों के बारे में गहरा ज्ञान था। उन्होंने वर्षाजल, भौमजल, नदी जल और बाढ़ जल
संग्रहण के अनेक तरीके विकसित कर लिए थे। मेघालय की राजधानी शिलांग में छत
वर्षाजल संग्रहण प्रचलित है। शहर के लगभग हर घर में यह व्यवस्था
है। भारत के सभी
भागों में वर्षा जल संचयन के पारंपरिक तरीके जैसे छत जल संरक्षण पद्धति लोकप्रिय
हो रहे हैं। मैसूर के गेंदाथुर गाँव में बहुत से परिवारों ने छत पर वर्षा जल संचयन
पद्धति को अपनाया है, जिससे गाँव पीने के पानी में समृद्ध हुआ है। तमिलनाडु राज्य ने सभी
घरों में छत पर वर्षा जल संचयन संरचनाएं रखना अनिवार्य कर दिया है। पश्चिमी राजस्थान
के बहुत सारे घरों में टाँकों की सुविधा अब भी है क्योंकि टाँकों का जल नल के जल
से अधिक स्वादिष्ट होता है।
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