सार ▪ कक्षा 11 ▪ अध्याय 2
संरचना तथा भूआकृति विज्ञान
अध्याय का सार
भूवैज्ञानिक संरचना व शैल समूह की भिन्नता के आधार पर भारत को 3 भूवैज्ञानिक खंडों में विभाजित किया गया है-
प्रायद्वीपीय खंड
▪ प्रायद्वीपीय खंड की सीमा कच्छ से आरंभ
होकर अरावली पहाड़ियों के पश्चिम से गुजरती हुई दिल्ली तक और फिर यमुना व गंगा नदी
के समानांतर राजमहल की पहाड़ियों व गंगा डेल्टा तक जाती है।
▪ उत्तर-पूर्व में कर्बी ऐंगलोंग व
मेघालय का पठार तथा पश्चिम में राजस्थान भी इसी खंड के विस्तार हैं।
▪ प्रायद्वीप मुख्यतः नाइस व ग्रेनाइट से
बना है।
▪ प्रायद्वीप में मुख्य रूप से अवशिष्ट
पहाड़ियां शामिल हैं जैसे- अरावली, नल्लामाला, जावादी, वेलीकोण्डा, पालकोण्डा
श्रेणी और महेंद्रगिरी पहाड़ियां आदि।
▪ पूर्व की ओर बहने वाली अधिकांश नदियां
बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले डेल्टा का निर्माण करती हैं।
हिमालय और अन्य अतिरिक्त प्रायद्वीपीय पर्वत
मालाएं
▪ हिमालय और अन्य अतिरिक्त प्रायद्वीपीय पर्वत
मालाओं की भूवैज्ञानिक संरचना प्रायद्वीपीय खंड की अपेक्षा तरुण, दुर्बल और लचीली
है।
सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान
सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र मैदान का
निर्माण हिमालय और प्रायद्वीप से निकलने वाली नदियों के साथ लाए गए अवसादों से हुआ
है।
इन मैदानों में जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000 मीटर है।
सामान्य
तौर पर भारत को 6 भूआकृतिक खंडों में विभाजित किया जा सकता है-
1. उत्तर तथा
उत्तरी-पूर्वी पर्वतमाला
उच्चावच पर्वत
श्रेणियों के संरेखण और दूसरी भू आकृतियों के आधार पर हिमालय को निम्नलिखित 5 उपखंडों
में विभाजित किया जा सकता है-
(i). कश्मीर या
उत्तरी-पश्चिमी हिमालय- कश्मीर हिमालय में अनेक पर्वत
श्रेणियां हैं, जैसे कारकोरम, लद्दाख, जास्कर और पीर पंजाल।
बृहत हिमालय और पीरपंजाल के बीच विश्व
प्रसिद्ध कश्मीर घाटी और डल झील है।
कश्मीर हिमालय करेवा के लिए भी
प्रसिद्ध है, जहां जाफरान की खेती की जाती है।
प्रसिद्ध तीर्थ स्थल वैष्णो देवी,
अमरनाथ गुफा और चरार-ए-शरीफ भी यहीं स्थित है।
जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर झेलम
नदी के तट पर स्थित है
इस क्षेत्र में डल एवं वुलर मीठे पानी
की एवं पांगांग सो और सोमुरीरी लवणयुक्त जल वाली झीलें हैं।
(ii). हिमाचल और उत्तरांचल हिमालय - हिमालय का यह हिस्सा पश्चिम में रावी नदी और पूर्व में काली नदी के बीच स्थित है।
इस प्रदेश के अंदर बहने वाली नदियां
रावी, व्यास, सतलुज, यमुना और घाघरा हैं।
लघु हिमालय में 1000 से 2000 मीटर
ऊंचाई वाले पर्वत नगर जैसे धर्मशाला, मसूरी, कसौली, अल्मोड़ा, लैंसडाउन और रानीखेत
इसी क्षेत्र में स्थित हैं।
बृहत हिमालय की घाटियों में भूटिया
प्रजाति के खानाबदोश लोग रहते हैं।
प्रसिद्ध फूलों की घाटी, गंगोत्री, यमुनोत्री,
केदारनाथ, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब एवं प्रसिद्ध पंच प्रयाग इसी क्षेत्र में स्थित
हैं।
(iii). दार्जिलिंग और
सिक्किम हिमालय- इसके पश्चिम में नेपाल हिमालय और पूर्व में
भूटान हिमालय है।
यहां तेज बहाव वाली तीस्ता नदी और
कंचनजंगा जैसी ऊंची चोटियाँ एवं गहरी घाटियां स्थित हैं।
(iv). अरुणाचल हिमालय-
यह पर्वत क्षेत्र भूटान हिमालय से लेकर पूर्व में दिफू दर्रे तक फैला
है।
इस क्षेत्र की मुख्य चोटियों में काँगतु
और नामचा बरवा शामिल हैं।
कामेंग, सुबनसिरी, दिहांग, दिबाँग और लोहित
यहां की प्रमुख नदियां हैं।
यहां की जनजातियां मोनपा, अबोर, मिशमी,
निशी और नागा ज्यादातर झूम खेती करते हैं।
झूम खेती के अन्य नाम- स्थानांतरी
खेती, स्लैश और बर्न कृषि
(v). पूर्वी पहाड़ियां और पर्वत- उत्तर में यह पटकाई बूम, नागा पहाड़ियां, मणिपुर पहाड़ियां और दक्षिण में मिजो या लुसाई पहाड़ियों के नाम से जानी जाती है।
बराक मणिपुर और मिजोरम की एक मुख्य नदी
है
2. उत्तरी भारत का
मैदान
●उत्तरी भारत का
मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा बहा कर लाए गए जलोढ़ क्षेत्र से
बना है
● भौतिक आकृति के आधार पर उत्तरी मैदान का विभाजन
4 वर्गों में किया गया है-
(i). भाबर- सिन्धु से लेकर तीस्ता तक नदियां पर्वतों
से नीचे उतरते समय ढाल पर 8 से 16 किलोमीटर चौड़ी पट्टी के रूप में कंकड़-पत्थरों
का निक्षेपण करती हैं। सभी सरिताएं इसमें लुप्त हो जाती हैं।
(ii). तराई- भाबर के दक्षिण में 15 से 30 किमी. दलदली व नमी भरा क्षेत्र जहां नदियां
पुनः निकल आती हैं।
(iii). बांगर - पुरानी जलोढ़ मृदा- इसमें चूनेदार निक्षेप पाए जाते हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में कंकड़
कहते हैं।
(iv). खादर- बाढ़ वाले मैदानों के नए तथा युवा निक्षेपों को खादर कहते हैं। इनका
निर्माण लगभग प्रत्येक वर्ष होता है। ये अत्यधिक उपजाऊ होते हैं।
● प्रायद्वीपीय भारत अनेक पठारों से मिलकर बना है
जैसे- हजारीबाग पठार, पालायु पठार, रांची पठार, मालवा पठार, कोयंबटूर पठार और
कर्नाटक पठार
● प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी भाग में मुख्य रूप
से काली मिट्टी पायी जाती है।
● प्रायद्वीपीय पठार की उत्तरी सीमा पर अरावली, विंध्यांचल और सतपुड़ा की
पहाड़ियां स्थित हैं।
● प्रायद्वीपीय भारत की सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी (2695 मी.) है।
मुख्य उच्चावच
लक्षणों के अनुसार प्रायद्वीपीय पठार को तीन भागों में बांटा जा सकता है
(i). दक्कन का पठार
इसके पश्चिम में पश्चिमी घाट, पूर्व
में पूर्वी घाट और उत्तर में सतपुड़ा, मैकाल एवं महादेव पहाड़ियां हैं।
पश्चिमी घाट को स्थानीय तौर पर
महाराष्ट्र में सहयाद्रि, कर्नाटक और तमिलनाडु में नीलगिरी, केरल में अन्नामलाई और
इलायची पहाड़ियां नाम दिया गया है।
पूर्वी और पश्चिमी घाट नीलगिरी पहाड़ियों में आपस में मिलते हैं।
(ii). मध्य उच्च भूमि
पश्चिम में अरावली पर्वत इसकी सीमा
बनाते हैं एवं यह दक्कन पठार की उत्तरी सीमा बनाते हैं।
प्रायद्वीपीय पठार के इस भाग का
विस्तार जैसलमेर तक है, जहां यह अनुदैर्ध्य रेत के डिब्बों और चापाकार (बरखान)
रेतीले टिब्बों से ढके हैं।
मध्य उच्च भूमि का पूर्वी विस्तार राजमहल की पहाड़ियों तक है, जिस के दक्षिण में स्थित छोटा नागपुर पठार खनिज पदार्थों का भंडार है।
(iii). उत्तरी पूर्वी
पठार
इसके अंतर्गत मेघालय और कार्बी ऐंगलोंग
पठार का क्षेत्र आता है।
इस में निवास करने वाली जनजातियों के
नाम के आधार पर मेघालय के पठार को तीन भागों में बांटा गया है- 1. गारो पहाड़ियां 2.
खासी पहाड़ियां 3. जयंतिया पहाड़ियां
असम की कार्बी ऐंगलोंग पहाड़ियां भी
इसी का विस्तार हैं।।
4. भारतीय मरुस्थल
विशाल भारतीय मरुस्थल अरावली पहाड़ियों
के उत्तर पूर्व में स्थित है।
यहां वार्षिक वर्षा 15 सेंटीमीटर से कम
होती है।
इस मरुस्थल के दक्षिणी भाग में लूनी
नदी बहती है।
5. तटीय मैदान
भूआकृतिक प्रक्रियाओं के आधार पर तटीय
मैदानों को दो भागों में बांटा जा सकता है-
(i). पश्चिमी तटीय मैदान- ये जलमग्न होने के
कारण पत्तनों एवं बंदरगाह विकास के लिए प्राकृतिक परिस्थितियां प्रदान करता है।
कांडला, मझगाँव, जवाहरलाल नेहरू (न्हावा
शेवा), मर्मा गांव, मंगलुरू, कोच्चि आदि पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बन्दरगाह हैं।
यहाँ महानदी, गोदावरी,
कृष्णा एवं कावेरी द्वारा विश्व के बड़े डेल्टाओं का निर्माण किया जाता है।
इस मैदान में चिल्का (उड़ीसा)
एवं पुलीकट (आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु की सीमा पर) दो बड़ी लैगून झीलें हैं।
6. द्वीपसमूह
भारत में 2
प्रमुख द्वीप समूह है-
1 बंगाल की
खाड़ी में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
2 अरब सागर में मिनिकॉय
एवं लक्षद्वीप द्वीप समूह
बैरन आइलैंड
भारत का एकमात्र ज्वालमुखी है, यह निकोबार द्वीप समूह में स्थित है।



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